मैंने गुस्से से सिर्फ इस एक खिलाड़ी के खिलाफ गेंदबाजी की है । शोएब अख्तर ओपन टॉक ।

Akthar
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पाकिस्तान के भूतपूर्व स्टार क्रिकेट खिलाड़ी शोएब अख्तर अपनी धमाकेदार तेज गेंदबाजी के जरिए विश्व के कई टॉप बल्लेबाजों को धमकी देते हैं। स्पष्टतः मैदान की बाउंड्री लाइन के करीब से दौड़ना शुरू करके बहुत तेज गति से दौड़ के आ कर बहुत तेज गति से गेंद डालने वाले इनको क्रिकेट प्रशंसक प्यार से रावलपिंडी एक्सप्रेस बुलाते हैं । कहा जाए तो इस दशक की सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट मैच में सबसे तेज गेंद डालने वाले गेंदबाज का सबसे बड़ा विश्व रिकॉर्ड बनाया है इन्होंने।

पिछले 2003 में इंग्लैंड के खिलाफ विश्व कप मैच में 161.3 किलोमीटर पर आवर गति से उनके द्वारा डाला गया गेंद ही विश्व में सबसे तेज डाला गया गेंद है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे तेज़ डाले गए गेंद में टॉप 6 गेंद के मालिक है शोएब अख्तर। इतने प्रतिभाशाली गेंदबाज होने के नाते वे हमेशा विश्व के टॉप बल्लेबाज को अपने धमाकेदार गेंदबाजी के जरिए डराना बहुत पसंद करते हैं।

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विशेषतः भारतीय क्रिकेट के जांभवन सचिन तेंदुलकर ,राहुल द्रविड़, वीरेंद्र सहवाग को जब कभी वे देखते हैं तब वे बहुत तेज गति से गेंद डालकर उन्हें डराने की कोशिश करते हैं। लेकिन उनकी गति से भी ना डरे सचिन तेंदुलकर ने कई बार उनके गेंदों को चौके और छक्कों में उड़ाया है। अतः उनके गेंद की गति की तरह ही बहुत ही क्रोधित और आक्रोशित रूप से ही सब शोएब अख्तर को जानते हैं।

ऐसी स्थिति में शोएब अख्तर ने ऑस्ट्रेलिया के जांभवन रिकी पोंटिंग के साथ हुए एक दिलचस्प मोमेंट के बारे में अब अपने मन की बात कही है। इसके संबंध में उन्होंने सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड समाचार पत्र में कहा है कि उस टेस्ट मैच के दौरान किसी एक खिलाड़ी को चोट पहुंचाने के बारे में इन्होंने सोचा था। उसको मध्य नजर रखते हुए ही मैंने बहुत तेज गति से गेंद डालें।

स्पष्टतः मैं देखना चाहता था कि क्या रिकी पोंटिंग मेरी तेज गेंदबाजी का जवाब दे पाएंगे कि नहीं । यह देखने के लिए मैंने जबरदस्ती उनके खिलाफ बहुत तेज गति से बाउंसर डालें क्योंकि उसके पहले मैंने कभी भी उन्हें अपनी गेंदबाजी के जरिए नहीं हराया है और कहना हो तो उस मैच में अगर वह बल्लेबाज रिकी पोंटिंग ना होते और उनके जगह कोई और बल्लेबाज होता तो मैं जरूर अपनी गेंद के जरिए उनका गर्दन तोड़ देता ।

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उनके द्वारा जिक्र किया गया मैच पिछले 1999 पर्थ नगर में खेला गया था। उस मैच के पहले खेली गई 2 मैच में पाकिस्तान ने बहुत बुरे हार का सामना किया और उस श्रृंखला में 2-0 के फर्क से वे पीछे थे। स्पष्टतः होबर्ट नगर में खेली गई दूसरी टेस्ट मैच में एडम गिलक्रिस्ट और जस्टिन लैंगर ने जोड़कर पाकिस्तान द्वारा निर्धारित 369 रन के लक्ष्य को पा लिया और ऑस्ट्रेलिया को एक बड़ी जीत दिलाई। इसकी वजह से पर्थ नगर में खेली गई तीसरी टेस्ट मैच में किसी भी हालत में पाकिस्तान को जीत दिलाने के लिए ही उन्होंने बहुत तेज गति से गेंद डाले थे।

उसकी वजह से ही उस समय बल्लेबाजी कर रहे रिकी पोंटिंग के खिलाफ इन्होंने जबरदस्ती तेज बाउंसर डाले। लेकिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ियों को मेरा आक्रमक स्टाइल बहुत ही पसंद था क्योंकि उन्होंने मुझे एक गुस्से से भरे ऑस्ट्रेलिया के गुण से भरे पाकिस्तानी के रूप में ही देखा था। मैंने भी उनका मुंह तोड़ जवाब दिया । 2005 में जस्टिन लैंगर के साथ मैंने जबरदस्त झगड़ा किया । मैंने मैथ्यू हेडन के साथ झगड़ा किया। लेकिन वे सब सिर्फ मैच के लिए किए गए झगड़े थे क्योंकि मैं उन सब को दिखाना चाहता था कि मैं उन सब से बहुत ही बेहतर हूं ।

जहां तक आक्रमक स्टाइल से खेलने का सवाल है ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी ही उसमें माहिर माने जाते हैं । उन्हीं की तरह मेरा बर्ताव भी होने के कारण उन सबको मैं बहुत पसंद आने लगा। साथ ही उन्होंने यह कहते हुए अपना दुख प्रकट किया कि अब खेल रहे ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ियों में वह आक्रमण स्टाइल नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा है कि रिकी पोंटिंग के प्रति वे बहुत सम्मान करते हैं और ब्रेट ली उनके एक सबसे करीबी दोस्त हैं ।

साथ ही उन्होंने कहा है कि ऑस्ट्रेलिया के लोग बहुत ही अद्भुत और प्यारे लोग हैं और यह देश इतना खूबसूरत है कि जो कोई भी इस देश को पहली बार देखे उससे प्यार करने लग जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि ब्रिसबेन में मौजूद ऑस्ट्रेलिया के भूतपूर्व जांभवन जे थॉमसन का घर उनका दूसरा घर जैसा है। उस साक्षात्कार में उन्होंने यह भी कहा है कि उनके जमाने में ज्यादा बाउंसर गेंद डालने का मौका दिया गया था लेकिन अब वह मौका कम कर दिया गया है।

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